लिवासा हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता और समय पर पहचान को बेहतर उपचार के लिए बताया जरूरी


चंडीगढ़: स्तन कैंसर के उपचार में बेहतर परिणामों के लिए जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान की अहम भूमिका पर जोर देते हुए लिवासा हॉस्पिटल, मोहाली के ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों की टीम, डायरेक्टर – मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ.जतिन सरीन, कंसल्टेंट – मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. प्रियांशु चौधरी, डायरेक्टर – रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डॉ. मीनाक्षी मित्तल, डायरेक्टर – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. विजय बंसल, डायरेक्टर – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. शुभ महिंद्रू, और कंसल्टेंट – क्लिनिकल हीमैटोलॉजी एवं बीएमटी फिजिशियन डॉ. मुकेश चावला, ने सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिलाओं को जागरूक करने और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विशेषज्ञों ने स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं को उनकी उम्र, व्यक्तिगत जोखिम कारकों तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उचित स्क्रीनिंग करवाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्तनों में होने वाले असामान्य बदलावों को समय रहते पहचानना और तुरंत चिकित्सकीय जांच करवाना बीमारी का जल्द पता लगाने तथा समय पर उपचार शुरू करने में मददगार साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों ने महिलाओं को स्तन या बगल में नई गांठ, स्तन के आकार या बनावट में बदलाव, त्वचा पर गड्ढे पड़ना, निप्पल में परिवर्तन, निप्पल से असामान्य स्राव तथा लगातार लालिमा या सूजन जैसे चेतावनी संकेतों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्तनों में होने वाला हर बदलाव कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन किसी भी असामान्य या लगातार बने रहने वाले बदलाव की जांच स्वास्थ्य विशेषज्ञ से अवश्य करवानी चाहिए, भले ही उसमें दर्द न हो।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अपने स्तनों के प्रति जागरूक रहना और उनमें होने वाले बदलावों को पहचानना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अनुशंसित स्क्रीनिंग और चिकित्सकीय जांच का विकल्प नहीं है। महिलाओं को सलाह दी गई कि वे स्वयं बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय समय पर डॉक्टर से परामर्श लें और डर या अनिश्चितता के कारण चिकित्सकीय जांच में देरी न करें।
विशेषज्ञों ने कहा कि चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी से बीमारी की पहचान और उपचार शुरू होने में विलंब हो सकता है, जिससे उपचार के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने महिलाओं से कैंसर से जुड़े डर, सामाजिक संकोच और गलत धारणाओं को दूर करने तथा स्तनों में किसी भी असामान्य बदलाव या स्वास्थ्य संबंधी चिंता होने पर बिना देरी किए विशेषज्ञ से संपर्क करने की अपील की।
विशेषज्ञों ने यह भी जोर दिया कि स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना केवल महिलाओं की ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने पुरुषों से अपनी माताओं, पत्नियों, बहनों और बेटियों के साथ स्तन स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत करने, स्तन कैंसर से जुड़े मिथकों और सामाजिक वर्जनाओं को दूर करने तथा महिलाओं को समय पर स्क्रीनिंग और उचित चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

