फ्लिपकार्ट के गोदाम से 4.58 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन चोरी होने का मामला, दो कर्मचारी गिरफ्तार


बठिंडा, 26 अक्टूबर। बठिंडा जिले में भूच्चो मंडी कैचियां के पास स्थित फ्लिपकार्ट के कथित गोदाम से 980 सैमसंग मोबाइल फोन चोरी होने के मामले में पुलिस ने दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, चोरी हुए मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत करीब 4 करोड़ 58 लाख रुपये है। पुलिस का दावा है कि मामले की जांच के दौरान 24 घंटे से भी कम समय में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। मामले में एक अन्य कर्मचारी को भी नामजद किया गया है, जिसकी कथित भूमिका की जांच की जा रही है।

पुलिस चौकी प्रभारी गुरप्रीत सिंह के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान मानसा जिले के अकलियां जालाली निवासी लखप्रीत सिंह और रामपुरा मंडी के आजाद नगर निवासी सुरिंदर सिंह उर्फ कन्नू के रूप में हुई है। पुलिस ने इस मामले में हरियाणा के उचाना निवासी बलविंदर सिंह को भी नामजद किया है। पुलिस के मुताबिक, उसकी भूमिका की जांच अभी जारी है।
पूछताछ में अन्य व्यक्तियों के नाम सामने आने का दावा
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ के दौरान गौतम, मानसा निवासी सुखप्रीत सिंह सोनी और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस इन व्यक्तियों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, इन व्यक्तियों की कथित संलिप्तता के संबंध में अभी जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के प्रयास जारी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल करने की प्रक्रिया की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य पूछताछ के माध्यम से चोरी हुए मोबाइल फोन का पता लगाना, उनकी बरामदगी के प्रयास करना और मामले में अन्य संभावित रूप से शामिल व्यक्तियों की भूमिका की जांच करना है।
23 अक्टूबर की रात की घटना
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गोदाम में चोरी की घटना 23 अक्टूबर की रात हुई थी। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
मामले में आगे की जांच जारी है। चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी, अन्य संदिग्धों की भूमिका और घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। गिरफ्तार व्यक्तियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। जब तक आरोप अदालत में साबित नहीं होते, तब तक उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता।

