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*हरियाणा के पत्रकारों को जल्दी मिलेगी कैश लेस हैल्थ सुविधा : नायब सिंह सैनी*

*एमडब्ल्यूबी की मांग पर पत्रकार कल्याण कोष की सहायता राशि ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख, सीएम नायब सिंह सैनी का आभार जताया*

 

*हरियाणा के पत्रकारों को जल्दी मिलेगी कैश लेस हैल्थ सुविधा : नायब सिंह सैनी*

*एमडब्ल्यूबी की मांग पर पत्रकार कल्याण कोष की सहायता राशि ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख, सीएम नायब सिंह सैनी का आभार जताया*

*चंद्र शेखर धरणी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल*

*एम डब्लूयु बी ने कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और ₹30 हजार मासिक पेंशन सहित कई मांगें उठाईं*

Chandigarh, 12.10.26

चंडीगढ़। हरियाणा में पत्रकारों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन (एमडब्ल्यूबी) के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर भारत अध्यक्ष चंद्र शेखर धरणी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। इस दौरान संगठन ने हरियाणा मीडिया कर्मी कल्याण कोष वितरण योजना में संशोधन कर पत्रकारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की राशि ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। एसोसिएशन ने इसे संकट के समय पत्रकारों को आर्थिक राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा के पत्रकारों को जल्दी मिलेगी कैश लेस हैल्थ सुविधा, अधिकारीयों को निर्देश दे चुके हैँ।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि पत्रकारों की मांगों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया जाएगा और जिन मांगों पर निर्णय संभव होगा, उन्हें जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल में एमडब्ल्यूबी के उत्तर भारत कोषाध्यक्ष तरुण कपूर के अलावा पवन चोपड़ा, थनेश्वर शर्मा, पीयूष जैन और योगिंद्र शर्मा शामिल रहे।

*कल्याण कोष की राशि बढ़ने से पत्रकारों को मिलेगी राहत : धरणी*

चंद्र शेखर धरणी ने कहा कि एमडब्ल्यूबी लंबे समय से पत्रकार कल्याण कोष के तहत आर्थिक सहायता बढ़ाने की मांग उठा रही थी। राशि ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किए जाने से पात्र पत्रकारों और उनके परिवारों को बीमारी, दुर्घटना तथा अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों में अधिक आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जनसमस्याओं को सामने लाने, जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाने और समाज को जागरूक करने का काम करते हैं। ऐसे में उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

धरणी ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पत्रकारों की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। एमडब्ल्यूबी को उम्मीद है कि कल्याण कोष की सहायता राशि बढ़ाने के बाद सरकार पत्रकारों से जुड़ी अन्य लंबित मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय लेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि एमडब्ल्यूबी की मांग पर प्रदेश सरकार पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होते ही उनकी मान्यता रद्द करने से संबंधित नियम पहले ही वापस ले चुकी है।

पत्रकारों के लिए ₹10 लाख तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा लागू करने की मांग

एमडब्ल्यूबी ने मुख्यमंत्री से पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना जल्द लागू करने का आग्रह किया। संगठन ने राजस्थान मॉडल की तर्ज पर योजना तैयार करने और इसमें अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने के साथ बाह्य रोगी उपचार यानी ओपीडी को भी शामिल करने का सुझाव दिया।

धरणी ने कहा कि कैंसर, हृदय रोग, किडनी प्रत्यारोपण और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़ी धनराशि खर्च होती है। कई बार पत्रकार परिवारों को इलाज के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कैशलेस स्वास्थ्य बीमा लागू होने से उन्हें जरूरत के समय उपचार कराने में राहत मिल सकती है।

एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया कि इस मांग पर प्राथमिकता के आधार पर विचार कर योजना को जल्द अधिसूचित किया जाए, ताकि पत्रकारों और उनके परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके।

*सेवानिवृत्त पत्रकारों की पेंशन ₹15 हजार से बढ़ाकर ₹30 हजार करने का आग्रह*

 

बैठक में सेवानिवृत्त पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। एमडब्ल्यूबी ने पात्र पत्रकारों की मासिक पेंशन 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग की। संगठन का कहना है कि वर्षों तक पत्रकारिता में सेवाएं देने वाले लोगों को सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।

एसोसिएशन ने पेंशन के लिए पांच वर्ष की अनिवार्य मान्यता संबंधी शर्त समाप्त करने, न्यूनतम 15 वर्ष की सक्रिय पत्रकारिता सेवा पूरी करने वाले पत्रकारों को पात्रता देने और पेंशन के लिए न्यूनतम आयु 58 वर्ष निर्धारित करने का सुझाव दिया। इसके अतिरिक्त पेंशन प्राप्त कर रहे पत्रकार की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी अथवा पात्र आश्रितों को पारिवारिक पेंशन देने की मांग भी रखी गई।

धरणी ने कहा कि इन बदलावों से लंबे समय तक पत्रकारिता करने वाले लोगों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा मिल सकेगा और उनके परिवारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

पत्रकारों के लिए ₹10 लाख दुर्घटना बीमा और टर्म इंश्योरेंस, संस्थापक सदस्यों को ₹33 लाख तक चिकित्सा सुरक्षा

एमडब्ल्यूबी ने पत्रकारों और उनके परिवारों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए संगठन स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। एसोसिएशन के अनुसार, पात्र पत्रकारों के लिए 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा और 10 लाख रुपये तक का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसके अलावा संस्थापक सदस्यों के लिए 33 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा बीमा सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

संगठन के अनुसार, इन सुविधाओं के लिए पात्र सदस्यों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, योजनाओं का लाभ लेने के लिए सदस्यता अवधि और संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी से जुड़े निर्धारित मानदंड लागू हैं।

धरणी ने बताया कि पिछले चार वर्षों में हरियाणा और चंडीगढ़ के तीन दर्जन से अधिक पत्रकारों तथा उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों और आपात परिस्थितियों में 48 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में संगठन ने सहयोग किया है। इनमें कैंसर, किडनी प्रत्यारोपण, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से जुड़े मामले शामिल हैं।

*डिजिटल पत्रकारों की मान्यता और सोशल मीडिया नीति सरल बनाने की मांग*..

बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए एमडब्ल्यूबी ने डिजिटल पत्रकारों की मान्यता संबंधी नीति को सरल और समावेशी बनाने का आग्रह किया। धरणी ने कहा कि समाचारों के प्रसार में डिजिटल माध्यमों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऑनलाइन माध्यमों और सोशल मीडिया पर समाचार प्रकाशित करने वाले पात्र पत्रकारों को भी सरकारी मान्यता तथा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।

संगठन का कहना है कि पत्रकारिता के बदलते स्वरूप के अनुरूप सरकारी नीतियों में संशोधन जरूरी है, ताकि डिजिटल माध्यमों में काम करने वाले पत्रकारों के हितों की भी रक्षा हो सके।

*पत्रकारों के आवास, परिवहन और बच्चों की शिक्षा के मुद्दे उठाए*

एमडब्ल्यूबी ने पत्रकारों की कार्य संबंधी जरूरतों और उनके परिवारों से जुड़े मुद्दों पर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। संगठन ने हरियाणा परिवहन विभाग की विभिन्न श्रेणियों की बसों में पत्रकारों के लिए कम से कम दो सीटें आरक्षित करने तथा निजी बसों में भी निशुल्क यात्रा की सुविधा देने पर विचार करने का आग्रह किया।

इसके अलावा पंचकूला में एमडब्ल्यूबी के मुख्यालय के लिए रियायती दरों पर सरकारी भूखंड उपलब्ध कराने और पत्रकारों के लिए विशेष आवासीय योजनाएं शुरू करने की मांग रखी गई। संगठन ने पत्रकारों के बच्चों को विद्यालयों, महाविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में तीन प्रतिशत आरक्षण देने का सुझाव भी दिया।

एसोसिएशन का कहना है कि आवास, परिवहन और शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं मिलने से पत्रकारों तथा उनके परिवारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो सकती है।

*वरिष्ठ पत्रकारों के सम्मान की पहल*

एमडब्ल्यूबी की ओर से वरिष्ठ पत्रकारों के योगदान को सम्मान देने के लिए भी पहल की जा रही है। धरणी ने बताया कि संगठन के कार्यक्रमों में 60 वर्ष से अधिक आयु के तीन वरिष्ठ पत्रकारों को मुख्य अतिथि के हाथों सम्मानित किया जाता है। इसका उद्देश्य पत्रकारिता में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले अनुभवी पत्रकारों के योगदान को पहचान देना है।

धरणी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, पारिवारिक पेंशन, डिजिटल पत्रकारों की मान्यता और आवास संबंधी मांगों पर भी प्राथमिकता से विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार कल्याण कोष की सहायता राशि में वृद्धि स्वागतयोग्य निर्णय है। अब अन्य मांगों पर भी कार्रवाई होने से पत्रकारों और उनके परिवारों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी।

एमडब्ल्यूबी ने स्पष्ट किया कि संगठन पत्रकारों के हितों की रक्षा, उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने और पत्रकारिता के क्षेत्र में सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए सरकार के समक्ष अपनी मांगें उठाता रहेगा।

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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