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हर 4.2 मिनट में एक पुरुष और हर 6.1 मिनट में एक पति की जिंदगी खत्म हो रही है

अब पुरुषों की पीड़ा को भी सुनना होगा: रोहित डोगरा

हर 4.2 मिनट में एक पुरुष और हर 6.1 मिनट में एक पति की जिंदगी खत्म हो रही है

1.25 लाख पुरुष आत्महत्याएं केवल आंकड़े नहीं, हर कुछ मिनट में टूटता है एक परिवार

 

अब पुरुषों की पीड़ा को भी सुनना होगा: रोहित डोगरा

 

 

चण्डीगढ़ : सितंबर माह आत्महत्या रोकथाम माह के रूप में मनाया जाता है, लेकिन भारत में सबसे भयावह और अनदेखा सच यह है कि आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ी संख्या पुरुषों की है, विशेषकर विवाहित पुरुषों और पतियों की।

इसी के तहत सेव इंडियन फैमिली (एसआईएफ), चण्डीगढ़ चैप्टर ने चंडीगढ़ में विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया। एसआईएफ कार्यकर्ताओं ने संस्था के स्थानीय अध्यक्ष रोहित डोगरा की अध्यक्षता में शहर के लोगों और विभिन्न वर्गों से संवाद कर आत्महत्या की रोकथाम, मानसिक तनाव और संकट में समय पर सहायता लेने की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया। अभियान के दौरान नागरिकों ने एसआईएफ के “नो मोर सुसाइड” संदेश का समर्थन किया और इस बात पर सहमति जताई कि आत्महत्या की रोकथाम के प्रयासों में समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना जरूरी है। एसआईएफ ने विशेष रूप से पुरुषों की समस्याओं और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की अपील की।

एनसीआरबी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 1,25,449 पुरुषों ने आत्महत्या की, जबकि महिलाओं की संख्या 45,245 रही। इसी प्रकार 86,564 पतियों ने आत्महत्या की, जबकि पत्नियों की संख्या 28,612 रही। यानी पुरुष आत्महत्याएं महिलाओं की तुलना में करीब 2.8 गुना और पतियों की आत्महत्याएं पत्नियों की तुलना में करीब 3 गुना हैं। इन आंकड़ों के अनुसार औसतन हर 4.2 मिनट में एक पुरुष और हर 6.1 मिनट में एक पति आत्महत्या कर रहा है। एनसीआरबी के आंकड़ों में आत्महत्या के प्रमुख कारणों में पारिवारिक समस्याएं और घरेलू समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आती हैं, जिनका हिस्सा 40 प्रतिशत से अधिक बताया गया है।

रोहित डोगरा ने कहा कि एसआईएफ सबसे बड़ी और एकमात्र “संकट में पुरुषों के लिए अखिल भारतीय हेल्पलाइन” (एसआईएफ वन) 08882 498 498 चलाता है जो हर महीने 4000-5000 कॉल प्राप्त करता है। इस हेल्पलाइन की मदद से हम लाखों पुरुष और उनके परिवारों को बचाने में सफल हुए है। रोहित डोगरा ने बताया की यह हेल्पलाइन आत्महत्या रोकथाम में बहुत उपयोगी साबित हुई है!

एसआईएफ-चंडीगढ़ के प्रतिनिधि रोहित डोगरा ने कहा कि जब हर 4.2 मिनट में एक पुरुष अपनी जान गंवा रहा हो, तो इसे केवल आंकड़ा मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। समाज को यह स्वीकार करना होगा कि ‘मर्द को भी दर्द होता है।’ पुरुष भी मानसिक, भावनात्मक और पारिवारिक संकट से गुजरते हैं और उनकी आवाज भी सुनी जानी चाहिए।” उन्होंने कहा कि पुरुष देश की लगभग आधी आबादी हैं और देश की अर्थव्यवस्था, कार्यबल तथा टैक्स बेस में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए उनके मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े मुद्दों को भी राष्ट्रीय नीति में उचित स्थान मिलना चाहिए।

एसआईएफ की सरकार से

संकट में पुरुषों के लिए 24 गुणा 7 राष्ट्रीय हेल्पलाइन स्थापित करने, पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष बजट और सहायता कार्यक्रम शुरू करने, आत्महत्या रोकथाम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने, घरेलू हिंसा संबंधी कानूनों को जेंडर न्यूट्रल बनाने पर विचार करने; तथा पुरुषों की समस्याओं के लिए राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग की।

रोहित डोगरा ने कहा कि यह किसी दूसरे वर्ग के अधिकारों के खिलाफ मांग नहीं है। हमारी मांग केवल इतनी है कि पुरुषों की समस्याओं को भी नीति-निर्माण और संस्थागत सहायता में उचित स्थान मिले। यदि हम आत्महत्या रोकना चाहते हैं, तो हमें हर उस व्यक्ति तक पहुंचना होगा जो संकट में है।

रोहित डोगरा ने कहा कि देश में महिलाओं, बच्चों, पशुओं, सड़कों, खनन और विभिन्न अन्य क्षेत्रों के लिए संस्थागत व्यवस्थाएं और आयोग मौजूद हैं। पुरुषों की समस्याओं के लिए भी एक संस्थागत आवाज की आवश्यकता है। राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग किसी दूसरे वर्ग के अधिकारों को कम करने की मांग नहीं है; यह पुरुषों की समस्याओं को भी नीति-निर्माण में जगह देने की मांग है।

उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय पुरुष आयोग से संबंधित प्राइवेट मेंबर बिल पहले से राज्यसभा में चर्चा और आगे की प्रक्रिया के लिए मौजूद है, इसलिए सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

अभियान में के.सी. शर्मा, रविंदर सिंह, नवीन कुमार, देविंदर कुमार, सचिन कुमार, गौरव कुमार, रंजीत गुप्ता, संजू वैद, हरदीप कुमार, राजिंदर बजाज, गुरप्रीत सिंह, संजय भंभरी, रोहित आनंद, संदीप कुमार, जसजोत सिंह, रविंदर पाल सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

एसआईएफ-चंडीगढ़ एक गैर-लाभकारी, स्वयंसेवी संगठन है, जो पुरुषों और परिवारों से जुड़े अधिकारों, कल्याण और जागरूकता के मुद्दों पर कार्य करता है।

Ravinder Popli

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