संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का वर्ष है : नरेंद्र

संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का वर्ष है : नरेंद्र
धर्म सम्मेलन एवं पंच परिवर्तन पर प्रेरक उद्बोधन
चण्डीगढ़ : संघ के शताब्दी वर्ष के पावन उपलक्ष्य में भगत सिंह बस्ती, विश्वकर्मा नगर, रामदरबार, चंडीगढ़ महानगर में एक भव्य धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पंजाब प्रांत के प्रांत प्रचारक नरेंद्र ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। सम्मेलन में सैंकड़ों की संख्या में समाज के विभिन्न वर्गों से नागरिकों, युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठजनों की उपस्थिति रही।
अपने उद्बोधन में नरेंद्र जी ने संघ के शताब्दी वर्ष को केवल उत्सव का अवसर न मानकर आत्मचिंतन, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का वर्ष बताया। उन्होंने कहा कि सौ वर्षों की यात्रा त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा की अमिट गाथा है, जिसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक नागरिक पर है।
कार्यक्रम का मुख्य विषय “पंच परिवर्तन से समाज जागरण” रहा। अपने विचारों में उन्होंने पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला.
स्व-परिवर्तन-व्यक्ति अपने आचरण, विचार और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाए, परिवार सुदृढ़ीकरण-संस्कारयुक्त परिवार ही सशक्त समाज की आधारशिला है, सामाजिक समरसता-जाति, पंथ और वर्ग के भेद से ऊपर उठकर समरस समाज का निर्माण, पर्यावरण संरक्षण-प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण का संकल्प व स्वदेशी एवं नागरिक कर्तव्य स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन एवं संविधान सम्मत कर्तव्यों के पालन का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति स्वयं में परिवर्तन लाता है तो परिवार सशक्त होता है, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र का उत्थान सुनिश्चित होता है। समाज जागरण का यह अभियान प्रत्येक मोहल्ले, प्रत्येक ग्राम और प्रत्येक परिवार तक पहुंचना चाहिए।
सम्मेलन में उपस्थित वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम के संदेश को सुदृढ़ किया गया।
कार्यक्रम का संचालन स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा सुव्यवस्थित रूप से किया गया। अंत में सभी उपस्थित नागरिकों ने समाज जागरण एवं राष्ट्र सेवा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
यह धर्म सम्मेलन न केवल वैचारिक संवाद का मंच बना, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को पुनः सुदृढ़ करने का प्रेरक अवसर सिद्ध हुआ।



