रविन्द्र पोपली/ चण्डीगढ़: नवोदित कवयित्री प्रिया कुमारी ने नारी शक्ति पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि हे नारी, तुम चिंगारी हो

रविन्द्र पोपली /चण्डीगढ़ : नव वर्ष के अवसर पर प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन के मार्गदर्शन में प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ में संस्कार भारती, चंडीगढ़ एवं बृहस्पति कला केंद्र के संयुक्त प्रयास से साहित्य सरिता का आयोजन किया गया। प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन ने कवियों का स्वागत करते हुए बताया कि आज साहित्य सरिता के मंच पर आज आप प्रस्तुति से कवियों का आंकड़ा 550 हो गया है, जो अपने आप में इतिहास बन गया है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर जे एस आनंद, चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ अनीश गर्ग तथा वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सुरजीत सिंह धीर ने मां सरस्वती की वंदना से किया। डॉ अनीश गर्ग ने नव वर्ष की मनोकामना व्यक्त करते हुए कहा कि कोई शिकवा ना कोई गिला चाहिए, नफरतों का खत्म ये सिलसिला चाहिए। हर सवाल को दंगा बना दिया, अब हर इक बात का हल मसला चाहिए।
नवोदित कवयित्री प्रिया कुमारी ने नारी शक्ति पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि हे नारी, तुम चिंगारी हो, तुम सब जनों पर भारी हो, तुम दुर्गा हो, तुम काली हो, रण में असुरों को मारी हो। अरुणा शर्मा डोगरा ने प्रभावी अंदाज में पाठ किया-हौसला मेरा देख कर घबराना मत, चूल्हा-चौका ही केवल करवाना मत। युवा कवयित्री कामिनी सिंह ने तालियां बटोरते हुए कहा कि मुझे मेरे तिरंगे से बेइंतहा प्यार है, जब भी कहीं उसे उन्मुक्त गगन में लहराता देखती हूं। दीपक खेतरपाल ने व्यंग्य के माध्यम से कहा कि नव वर्ष के शुभ अवसर पर छपा अखबार में एक इश्तिहार, बना रही है योजना राज्य की सरकार। शहर की सीमा पर दिए जाएंगे, सस्ते दामों में फ्लैट, शर्त यह है कि आवेदनकर्ता हो, एक अच्छा साहित्यकार।
डा नेहा पालीवाल ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि देख रही हूं मुख उसका चंद्र सा गोल है, उसको कोई स्मृति दोहराती है।
कुसुम धीमान कलिका ने छंद पाठ करते हुए कहा कि सोच रखो दृढ़ समाज सेवा, नारा राष्ट्र विकास। नया वर्ष आया है साथी, प्रण कर लो कुछ खास। डॉ रेखा मित्तल ने अपनी रचना में कहा कि नहीं बिखरती मन के अंदर, तो कैसे लिखी जाती कविता। लावा बन नहीं बहती अगर, तो कैसे उकेरी जाती कविता। अनीता गरेजा ने घरेलू नारी की व्यथा को इन शब्दों में व्यक्त किया कि घर की हवा ने एक सवाल जोर से दोहराया, आज खाने में क्या है बनाया। अन्नू रानी शर्मा ने प्रभावी पाठ किया, रचना में अवसाद लिखूं बस, किंचित ना हो, किंचित ना हो।
डॉ विनोद कुमार शर्मा ने परम सुख शीर्षक रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि वह सुख क्या जो आया और गया,
जीवन में सीखो करना कुछ नया। अरुण शर्मा बेताब ने हास्य कविता में कहा कि क्या कहती हो काम वाली जो नहीं है आई, हम तो हैं ना, लाओ बरतन हम धुलवाएं, क्या कहती हो। ऋषि राज ने पंजाबी में पाठ किया कि साढे कोल वी हो गया सी रुपैया दस लाख, चमक गई सी फेर मित्रा दी अख।
डॉ ममता कालड़ा ने भक्ति रस में कहा कि रामकथा है ज्ञान का सागर, डुबकी लगाओ। डॉ संगीता शर्मा कुंद्रा गीत चंडीगढ़ ने मनमोहक प्रस्तुति देते हुए कहा कि फंसा हो कोई उलझन में, दिखाई दे न और मंजिल, तो देना ज्ञान करके गीत तुम गुणगान गीता से। अंशुकर महेश ने दार्शनिक भाव में कहा कि मेरे जीवन को मलिन कर कैसे हो सकते तुम शुद्ध,सिद्धार्थ तनिक बतलाओ, क्योंकर हो गए तुम बुद्ध। आर के भगत, विश्वजीत ने भी अपनी कविताओं से खूबसूरत रंग बिखेरा। कार्यक्रम में विशेष रूप से मनोज सिंह, मंत्री, संस्कार भारती चंडीगढ़, राजन सुदाम, दीया, अमनदीप सिंह सैनी भी उपस्थित रहे। संस्कार भारती चंडीगढ़ के अध्यक्ष यशपाल कुमार ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।



