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मामला सेक्टर 22-C स्थित कोठी नंबर 2781

मामला सेक्टर 22-C स्थित कोठी नंबर 2781 के बंटवारे और बिक्री से जुड़ा है। इस संपत्ति को लेकर पहले 6 जनवरी 2017 को प्रारंभिक डिक्री और 1 दिसंबर 2018 को अंतिम डिक्री पारित हुई थी। इसके बाद संपत्ति की बिक्री के लिए निपटारे की याचिका दायर की गई।

15 अक्टूबर 2025 को अदालत की निगरानी में कोठी की नीलामी हुई, जिसमें पंकज बंसल ने 2 करोड़ 10 लाख रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाकर संपत्ति खरीदी। इसके बाद राजिंदर कौर (डिक्री होल्डर नंबर-1) ने अपने जीपीए धारक जे.बी. सिंह के माध्यम से और रणजीत सिंह (जजमेंट डेब्टर नंबर-3) ने संयुक्त रूप से नीलामी रद्द करने के लिए अपील दायर की थी।

 

अपील में कहा- रेट ज्यादा, कम में बेच दिया

 

अपीलकर्ताओं ने कहा कि नीलामी से पहले कोर्ट ने कोठी की न्यूनतम कीमत तय नहीं की। कलेक्टर रेट और मार्केट रेट ज्यादा होने के बावजूद मकान को कम दाम में बेच दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीलामी की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं अपनाई गई और कुछ इच्छुक खरीदारों को बोली में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिला।

अपीलकर्ताओं का दावा था कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 नियम 66 से 68 का पालन नहीं किया गया। मकान की असली कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपये है और इसकी न्यूनतम बोली कम से कम 2.20 करोड़ रुपये तय होनी चाहिए थी।

पहले भी हो चुकी थी नीलामी

 

रिकॉर्ड के अनुसार, इससे पहले 6 जनवरी 2025 को भी नीलामी हुई थी। उस समय 2 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये की बोली लगी, लेकिन सफल बोलीदाता निर्धारित समय में 25 प्रतिशत राशि जमा नहीं कर सका। इसके बाद उसे भविष्य की नीलामी में भाग लेने से रोक दिया गया। बाद में पुनः नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई। एक सह-स्वामी ने स्वयं आवेदन देकर आम जनता को भी नीलामी में भाग लेने की अनुमति देने की मांग की थी।

 

अदालत ने क्यों खारिज की अपील, 2 पॉइंट में जानिए…

 

सबकी मौजूदगी में नीलामी, रिजर्व प्राइस पर आपत्ति नहीं: कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नीलामी की पूरी प्रक्रिया संबंधित पक्षों की मौजूदगी में कराई गई थी। उस समय किसी भी पक्ष ने रिजर्व प्राइस को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि नीलामी में किसी गड़बड़ी से उन्हें कोई बड़ा नुकसान हुआ है।

मार्केट रेट का पक्का दस्तावेज नहीं, नीलामी कोर्ट की निगरानी में हुई: कोर्ट ने यह भी कहा कि बाजार मूल्य ज्यादा होने का कोई पक्का दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किया गया। आदेश 21 नियम 90 सीपीसी के तहत नीलामी रद्द करने के लिए ठोस कारण जरूरी होता है, जो इस मामले में साबित नहीं हुआ। अदालत ने यह भी माना कि नीलामी कोर्ट की निगरानी में पूरी हुई और सफल बोली लगाने वाले ने तय

रकम जमा कर दी थी।

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