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मानवता का मूल है सनातन संस्कृति, जो प्रकृति को ईश्वर का रूप मानती है : कथा व्यास आचार्य श्री हरि जी महाराज

मानवता का मूल है सनातन संस्कृति, जो प्रकृति को ईश्वर का रूप मानती है : कथा व्यास आचार्य श्री हरि जी महाराज

चण्डीगढ़ : धर्म सम्मेलन आयोजक समिति सेक्टर द्वारा सुबह कस्टम सोसाइटी के सामने खुले मैदान में धूमधाम से विशाल धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें 50, 51, 63 सेक्टर और सोसाइटी के निवासियों एवं संस्थाओं ने भाग लिया इस अवसर पर सम्मेलन में वक्ता सरदार बलजिंदर सिंह ने गुरु तेग़ बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित उनके सर्वोच्च बलिदान, त्याग और “हिंद दी चादर” के रूप में मानवता की रक्षा के प्रति उनके योगदान पर व्याख्यान दिए।

कथा व्यास आचार्य श्री हरि जी महाराज ने बताया कि मानवता का मूल है सनातन संस्कृति, जो प्रकृति को ईश्वर का रूप मानती है। जल, अग्नि, पृथ्वी, वृक्षों की पूजा यहाँ की परंपरा है और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ एवं ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ आदि आदर्श वाक्यों को आत्मसात किया जाता है।

राष्ट्रीय सेविका समिति से प्रतिभा (महानगर कार्यवाहिका) ने पंच परिवर्तन पर विषय रखे तथा सुमित कुमार (महानगर प्रचारक आरएसएस) ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा और सेवा कार्यों पर सभी को अवगत कराया। आचार्य अर्जुन देव जी ने देश भक्ति पर अपने विचार दिए ।अंत इस कार्यक्रम के अध्यक्ष भुपिन्दर कुमार ने सभी सस्थाओं तथा सदस्यों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर कार्यक्रम अध्यक्ष भुपिन्दर कुमार, रमेश शर्मा, राजिंदर जोशी, राजिंदर शर्मा, समीर चाकू, रणजोध जामवाल, सुशील शर्मा, सरगुन अरोड़ा आदि सहित श्री राधा माधव सेवा ट्रस्ट, सिंह सभा सेक्टर 51, भारत विकास परिषद, ध्यान योग केंद्र, सभी आरडबल्यूए तथा कीर्तन मंडलियों ने भाग लिया।

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