news

पूरी दुनिया में “हरे कृष्ण” आंदोलन की अलख जगाने वाले प्रभुपाद जी की 152वीं जन्मतिथि मनाई गई

 चण्डीगढ़ : आज श्री चैतन्य गौड़ीय मठ सेक्टर 20 चंडीगढ़ में पूरे विश्व में हरे कृष्ण आंदोलन के प्रणेता एवं विश्व व्यापी कृष्ण भक्ति संस्थाओं के सूत्रधार महान वैष्णव संत श्री भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर प्रभुपाद जी की 152वीं जन्मतिथि बहुत ही श्रद्धा एवं विधि विधान हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। मठ मंदिर के प्रवक्ता जयप्रकाश गुप्ता ने बताया कि अपने इस श्रद्धा के मुख्य नायक प्रभुपाद जी की जन्म तिथि मनाने के लिए सुबह से ही भक्तों में उमंग जोश भरा हुआ था। मंगल आरती के पश्चात भजन संकीर्तन प्रवचन कार्यक्रम का आयोजित किया गया। मठ मंदिर के स्वामी सन्यासी श्री वामन महाराज जी ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि आज ही के दिन विश्व के इस शुद्ध कृष्ण भक्ति के महान वैश्णव संत ठाकुर प्रभुपाद जी का जन्म प्रसिद्ध महान तीर्थ जगन्नाथ पुरी धाम उड़ीसा में 6 फरवरी 1874 को भक्ति विनोद ठाकुर जी के घर पर हुआ था। इनके पिता श्री भक्त विनोद ठाकुर जी ब्रिटिश काल में जिला मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे जो कि उसे समय यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था, ठाकुर प्रभुपाद जी बचपन से ही कुछ सागर बुद्धि मेधावी छात्र थे। उन्होंने छोटी सी उम्र 7 वर्ष मैं ही श्रीमद् भागवत गीता के पूरे श्लोक कॉन्टैक्ट कर लिए थे और वह अपने समय के जाने-माने जोशी आचार्य विद्वान माने जाते थे। अति उच्च शिक्षा प्राप्त होने के बावजूद भी उन्होंने उसे समय के महान वैष्णव संत और गौर किशोर दास बाबा जी महाराज जी जो की निरीक्षक थे को अपना गुरु बनाया था इन्होंने 100 करोड़ हरि नाम महामंत्र का जब करने के पश्चात उन्होंने पूरे विश्व में शुद्ध कृष्ण भक्ति का प्रचार प्रसार के लिए एक ऐसी छत का निर्माण किया जिसमें की बिना किसी जाति धर्म नस्ल एवं रंगभेद के निर्भय होकर इस छठ के नीचे आकर शुद्ध कृष्ण भक्ति के लिए भजन संकीर्तन कर सकता है। आज उनकी ही यह दिन है कि पूरे विश्व के गांव-गांव शहर में हरे कृष्ण संकीर्तन नाम की ध्वनि गूंज रही है,, आज पूरे विश्व में लगभग 5000 से भी अधिक शुद्ध कृष्ण भक्ति के प्रचार केंद्रों मैं प्रेम अवतारी भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी के कृष्ण भक्ति के संदेश को प्रचार प्रसार और कृष्ण भक्ति शास्त्र सम्मत विधि विधान पूर्वक की जा रही है, आज भक्तों ने अपने इस महान नायक के जन्म महोत्सव के उपलक्ष पर उन्हें 56 तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया और 152 शुद्ध देसी घी के दीपकों से उनकी महा आरती की गई, और नृत्य संकीर्तन भजन कर आनंद प्राप्त किया कार्यक्रम के पश्चात भगवान को अर्पित स्वादिष्ट भोग प्रसाद भंडारा भक्तों में वितरित किया गया l

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *