गौड़ीय मठ के संस्थापक माधव गोस्वामी महाराज जी की 47वीं पुण्यतिथि मनाई गई

गौड़ीय मठ के संस्थापक माधव गोस्वामी महाराज जी की 47वीं पुण्यतिथि मनाई गई
श्री चैतन्य महाप्रभु जी के शुद्ध कृष्ण भक्ति के प्रेम संदेश को पहुंचाने के लिए भारत के चारों दिशाओं में गौड़ीय मठों की स्थापना की थी माधव गोस्वामी महाराज ने
चण्डीगढ़ : आज श्री चैतन्य गौड़ीय मठ सेक्टर 20 चंडीगढ़ में अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौड़ीय मठ संस्थान के संस्थापक श्रीमद् भक्ति दायित्व माधव गोस्वामी जी महाराज जी की 47वीं पुण्यतिथि बहुत ही श्रद्धा भाव एवं विधि विधान पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर प्रातः काल मंगल आरती के पश्चात कई कार्यक्रम आयोजित किए गए और उनसे कृपा प्रार्थना की गई। ये जानकारी मठ के प्रवक्ता जयप्रकाश गुप्ता ने दी। श्री चैतन्य गौड़ीय मठ, चंडीगढ़ के प्रभारी त्रिदंडी स्वामी वामन महाराज जी ने भक्तों को संबोधित करते हुए बताया कि अविभाजित भारत के बांग्लादेश स्थित कंचनपड़ा के एक छोटे से गांव में निशिकांत बंदोपाध्याय के घर में वर्ष 1904 में हुआ था और वे 1979 में आज ही के दिन इस संसार को छोड़कर गोलोक धाम चले गए थे। वह बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्धि और धार्मिक आस्था में लीन रहते थे। उन्होंने संन्यास लेने के पश्चात भारतवर्ष के पूर्व से पश्चिम व उत्तर से दक्षिण तक भगवान श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु जी के शुद्ध कृष्ण भक्ति के प्रेम संदेश को पहुंचाने के लिए भारत के चारों दिशाओं में गौड़ीय मठों की स्थापना की। आज लाखों की संख्या में भारतवर्ष के अतिरिक्त विदेश में हरि नाम संकीर्तन और सनातन धर्म के नियमों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने सन 1970 में चंडीगढ़ प्रशासन से जमीन लेकर यहां पर विशाल कृष्ण भक्ति प्रचार केंद्र चैतन्य गौडिया मठ की स्थापना की, जिसमें आज की तारीख में हजारों की संख्या में भक्त यहां पर जुड़े हुए हैं और भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी द्वारा प्रदत्त मार्ग पर चलकर आनंद प्राप्त कर रहें है। उन्होंने एक ऐसी छत का निर्माण किया जिसमें कोई भी बिना किसी जाति, धर्म, भेद के इस छत के नीचे आकर शुद्ध कृष्ण भक्ति का भजन कर आनंद प्राप्त कर सकता है। आज भक्तों एकत्रित होकर अपनी इस महानायक श्री माधव गोस्वामी महाराज जी को उनके पुण्यतिथि पर भजन संकीर्तन कथा प्रवचन कर उन्हें याद किया और उन्हें 51 शुद्ध देसी घी के दीपकों से उनकी आरती की गई। भक्तों ने अपने श्रद्धा सुमन उन्हें अर्पित किए व कार्यक्रम के पश्चात भगवान को अर्पित स्वादिष्ट व्यंजन प्रसाद अर्पित किया गया।




