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ऊर्जा मंत्री के विरोध के बावजूद निजी बिजली कंपनी को 25 साल का लाइसेंस, सरकार जनता को जवाब दे: राजबीर

ऊर्जा मंत्री के विरोध के बावजूद निजी बिजली कंपनी को 25 साल का लाइसेंस, सरकार जनता को जवाब दे: राजबीर

सरकारी बिजली निगम सक्षम हैं तो समानांतर निजी व्यवस्था की जरूरत क्यों? किसानों, कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग: राजबीर भारतीय

 

चंडीगढ़।

 

हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 वर्ष का समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.), चंडीगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि इस निर्णय के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों की निष्पक्ष समीक्षा कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि निजीकरण के संभावित प्रभावों के मद्देनजर एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्गों के कर्मचारियों एवं युवाओं के रोजगार, आरक्षण, सेवा सुरक्षा और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सवालों पर सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

 

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि बिजली केवल एक व्यावसायिक सेवा नहीं, बल्कि किसानों की सिंचाई, विद्यार्थियों की पढ़ाई, गरीब परिवारों के घरेलू जीवन और छोटे कारोबारियों की आर्थिक गतिविधियों का आधार है। इसलिए बिजली वितरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में दीर्घकालीन नीतिगत बदलाव करते समय आम जनता के हितों, सरकारी बिजली निगमों की भूमिका और सामाजिक न्याय से जुड़े पहलुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब हरियाणा में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) पहले से बिजली वितरण की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, तो समानांतर निजी व्यवस्था की आवश्यकता क्यों पड़ी? यदि सरकारी निगमों की कार्यप्रणाली में कमियां हैं, तो कर्मचारियों की कमी दूर करने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी सुधार करने और उपभोक्ताओं की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं? सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री अनिल विज द्वारा विधानसभा में समानांतर लाइसेंस के प्रस्ताव का विरोध किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन इसके बावजूद आयोग ने 19 अक्टूबर 2026 को निजी कंपनी को लाइसेंस प्रदान कर दिया। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस निर्णय के बाद उसकी वर्तमान नीति क्या है और क्या वह आदेश की समीक्षा या किसी कानूनी विकल्प पर विचार कर रही है।

 

जनता को केवल बयानों के बजाय सरकार की वास्तविक स्थिति और आगे की कार्रवाई की जानकारी मिलनी चाहिए।

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि निजी कंपनी की ओर से पांच वर्षों में लगभग 4,716.73 करोड़ रुपये के निवेश की योजना प्रस्तुत किए जाने की खबरें सामने आई हैं। सरकार और आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि इस निवेश की निगरानी कैसे होगी, निर्धारित निवेश नहीं होने की स्थिति में क्या कार्रवाई की जाएगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलने की गारंटी किस प्रकार सुनिश्चित होगी।

साथ ही, बिजली की दरों, सेवा शुल्क, मौजूदा सब्सिडी और शिकायत निवारण व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

 

उन्होंने चिंता जताई कि यदि निजी कंपनियां अधिक उपभोक्ता घनत्व और बेहतर राजस्व वाले क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देती हैं, तो सरकारी बिजली निगमों की आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि उपभोक्ताओं और दूरदराज के इलाकों में बिजली वितरण की जिम्मेदारी किस प्रकार निभाई जाएगी? सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शहरी क्षेत्रों में निजी भागीदारी बढ़ने के कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

बिजली नेटवर्क के उपयोग, बिजली खरीद, लागत के बंटवारे और सरकारी निगमों के वित्तीय दायित्वों से संबंधित नियम भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

 

एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस कर्मचारियों के हितों पर विशेष ध्यान देने की मांग:

 

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ने से रोजगार के स्वरूप, नई भर्तियों, संविदा कर्मचारियों की स्थिति और सरकारी निगमों में भविष्य के रोजगार अवसरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन किया जाना चाहिए। सरकारी सेवाओं में लागू संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था और निजी क्षेत्र में रोजगार संबंधी नियमों के बीच अंतर को ध्यान में रखते हुए एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्गों के युवाओं के अवसरों तथा सामाजिक प्रतिनिधित्व पर संभावित प्रभावों की समीक्षा आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल लाइसेंस जारी होने से आरक्षण समाप्त होने या कर्मचारियों की नौकरी जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। हालांकि, सरकार की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, नियमित भर्तियों, संविदा कर्मियों के अधिकारों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के रोजगार अवसरों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करे। किसी भी बदलाव से पहले प्रभावित कर्मचारियों और उनके संगठनों के साथ संवाद किया जाना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि सरकारी बिजली निगमों में कर्मचारियों की कमी, लंबित कनेक्शन, तकनीकी समस्याओं और उपभोक्ताओं की शिकायतों जैसी कमियों को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकारी व्यवस्था को मजबूत किए बिना निजी विकल्पों को बढ़ावा देना अपने आप में सुधार का प्रमाण नहीं है। यदि निजी कंपनी बेहतर सेवाएं देने का दावा करती है, तो सरकारी निगमों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए भी समयबद्ध योजना बनाई जानी चाहिए। दोनों व्यवस्थाओं की लागत, सेवा गुणवत्ता और उपभोक्ताओं को मिलने वाले लाभों की निष्पक्ष तुलना जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

 

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि किसी निजी कंपनी को 25 वर्ष का लाइसेंस देना एक दीर्घकालीन निर्णय है। इसलिए लाइसेंस की प्रमुख शर्तें, कंपनी की वित्तीय एवं तकनीकी क्षमता के आकलन, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट, संबंधित पक्षों की आपत्तियां और आयोग के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने चाहिए। निर्णय की पारदर्शिता से ही जनता की शंकाओं का समाधान हो सकता है और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।

 

उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि क्या भविष्य में समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था को हरियाणा के अन्य जिलों में लागू करने की कोई योजना है। यदि ऐसा कोई प्रस्ताव है, तो सरकारी बिजली निगमों की भूमिका, ग्रामीण विद्युतीकरण, कर्मचारियों के भविष्य, सामाजिक प्रतिनिधित्व और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या नीति अपनाई जाएगी?

 

राजबीर सिंह भारतीय ने हरियाणा सरकार और HERC से मांग की कि इस निर्णय के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाए, सरकारी बिजली निगमों की वित्तीय स्थिति और सुधार योजनाओं को सार्वजनिक किया जाए तथा किसानों, कर्मचारी यूनियनों, उपभोक्ता संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ खुला संवाद आयोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था में किसी भी बदलाव का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देना होना चाहिए, न कि आम जनता और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करना।

 

उन्होंने विपक्षी दलों, किसान संगठनों, कर्मचारी यूनियनों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे इस विषय पर तथ्यों के आधार पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आजीविका, कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, आम उपभोक्ताओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय से जुड़ा है।

 

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि बिजली जनता की बुनियादी जरूरत है, केवल मुनाफे का साधन नहीं। हरियाणा सरकार को जवाब देना चाहिए कि समानांतर निजी व्यवस्था से आम उपभोक्ताओं को क्या लाभ मिलेगा, सरकारी बिजली निगमों को मजबूत करने की उसकी योजना क्या है और एससी, एसटी, ओबीसी एवं ईडब्ल्यूएस वर्गों के कर्मचारियों तथा युवाओं के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी। जनता की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि होने चाहिए।

 

जारीकर्ता:

राजबीर सिंह भारतीय

अध्यक्ष, ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.), चंडीगढ़ प्रदेश

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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