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Ravinder Popli :-राजनीति, पहचान का संकट और साहित्य विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित

चण्डीगढ़ : भू-राजनीति, पहचान का संकट और साहित्य विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन पीयू के गुरु नानक सिख अध्ययन विभाग द्वारा साहित्य अकादमी, दिल्ली तथा चण्डीगढ़ साहित्य अकादमी के सहयोग से किया गया। इस संगोष्ठी की मुख्य अतिथि प्रो. मीनाक्षी गोयल, डीन (रिसर्च) थीं। प्रो. गुरपाल सिंह ने सभी गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत किया। अपने उद्घाटन भाषण में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा कि पहचान का संकट कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता की एक बहुत पुरानी समस्या है। उन्होंने भू-राजनीति में होने वाले संघर्षों के अनेक कारणों और उदाहरणों पर प्रकाश डाला।
हरियाणा साहित्य अकादमी के अध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि भू-राजनीति इतिहास और भूगोल की परस्पर जुड़ी हुई अवधारणा है। भूगोल इतिहास को आकार देता है और अंततः वही भू-राजनीति को प्रभावित करता है। अन्य वक्ताओं में प्रो. रवैल सिंह (संयोजक, पंजाबी बोर्ड, साहित्य अकादमी दिल्ली), प्रो. भूपिंदर बराड़ (राजनीति विज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय), तथा हरीश पुरी शामिल थे। धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. मनमोहन सिंह, अध्यक्ष, चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
दो दिवसीय इस संगोष्ठी में विषय आधारित अनेक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें परमजीत सिंह ढींगरा, कुलदीप सिंह, परवीन कुमार, कुमार सुशील, वनीता, रविंदर कौर, तजिंदर सिंह, सरबजीत सिंह मान, मंजिंदर सिंह, बरिंदर कौर, बलजीत कौर रियार आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। सत्रों की अध्यक्षता क्रमशः कुलदीप सिंह और रेणुका सिंह ने की। चर्चा के मुख्य विषय पंजाब की समस्याएँ, प्रवासन, भाषा भेद एवं संकट, सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे तथा लैंगिक प्रश्न रहे।
समापन सत्र की अध्यक्षता पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ की डीयूआई प्रो. योजना रावत ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह आयोजन अत्यंत सफल रहा। समापन भाषण प्रख्यात विदुषी प्रो. पम्पा मुखर्जी द्वारा दिया गया।
इस संगोष्ठी में डॉ. दीपक मनमोहन, डॉ. अनीश गर्ग, उपाध्यक्ष चंडीगढ़ साहित्य अकादमी, सुभाष भास्कर, सचिव, चंडीगढ़ साहित्य अकादमी, परमजीत सिद्धू, संतोष धीमान, अश्वनी शांडिल्य, भूपिंदर मलिक, जसपाल सिंह, निर्मल जसवाल, सरदारा सिंह चीमा, परमजीत मान, पाल अजनबी, गणेश दत्त, वरिंदर छठा, मनजीत सिंह खेहरा, अमनदीप सिंह, जगतार सिंह जोग, देविंदर सिंह, परमवीर सिंह, वीरपाल कौर तथा संजय कुमार भी उपस्थित थे।

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